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यूपी के किसानों को नैनो तकनीक से बनाए गए 500 मिली लीटर के बोतल में यूरिया खाद मिलेगी अब बोरी का झंझट खत्म ।

दिल्ली /नोयडा (ऑपरेशन क्राइम अलर्ट ब्यूरो) युरिया खाद अब किसानों को अपने खेत में यूरिया खाद बोरियों में नहीं ले जाना होगा बल्कि यूरिया खाद बोतल में मिलेगी, जिससे किसानों को खाद की बोरी की ढुलाई करने का झंझट खत्म हो जाएगा। यह खबर तेजी से प्रयोग के लिए पूर्वी उप्र के देवरिया जिले से आई है।यूपी के किसानों को नैनो तकनीक से बनाए गए 500 मिली लीटर के बोतल में यूरिया खाद मिलेगी अब बोरी का झंझट खत्म ।
सब कुछ ठीक रहा तो जुलाई के पहले हफ्ते में नैनो यूरिया की पहली खेप गुजरात से देवरिया में नैनो यूरिया की 15 हजार बोतल पहुंच जाएगी। इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
कृषि वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों के सफल प्रयास के बाद नैनो तकनीक से यूरिया का निर्माण भारत सरकार के उपक्रम इफको द्वारा किया गया है। जिसके तहत नैनो यूरिया 500 मिली लीटर की बोतल में है। जिसकी कीमत 240 रुपये तय की गई है।
समस्या यह रही थी –
 45 किलो की सफेद दाने वाली बोरी की यूरिया को पारम्परिक यूरिया कहा जाता है।

जहां इस यूरिया की वास्तविक कीमत 900 से 950 रुपये प्रति बोरी पड़ती है। इसमें सरकार द्वारा 700 रुपये की सब्सिडी दी जाती है, इससे यह यूरिया किसानों को 250 रुपये के प्रति बोरी के हिसाब से मिल पाती है। इसी कारण जब किसानों की यूरिया की अधिक जरूरत होती है तब यह बाजार से गायब हो जाती है। कहने का मतलब इसकी कालाबाजारी होती है। कभी कभी तो यह यूरिया 500 रुपये

प्रति बोरी तक किसान भाइयों को खरीदनी पड़ती है, नैनो यूरिया ने किसान भाइयों की इस समस्या का समाधान कर दिया है।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस्तेमाल से अधिक बरबाद होने वाली पारम्परिक यूरिया से भारतीय खेती व भारतीय जलवायु को काफी नुकसान पहुंचता है।

  • यूरिया का जो भाग हवा में बरबाद होता है, वो पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाता है और हानिकारक ग्रीन हाउस गैसों का कारण बनता है।
  • जो भाग मिट्टी में जाता है वो मिट्टी का स्वास्थ्य खराब करता है। इससे मृदा का पीएच मान गड़बड़ाता है, जिसका सीधा असर खेती और पैदावार पर पड़ता है।
  • इसके अलावा इससे मिट्टी अम्लीय यानी क्षारीय हो जाती है, जिससे कई तरह की उपयोगी फसलों को नहीं लिया जा सकता है।
  • साथ ही मिट्टी में बरबाद होने वाला यूरिया भूमिगत जल को दूषित करता है। पारम्परिक यूरिया के इन विकारों को दूर करने के लिए नैनो यूरिया की खोज की गयी है।
  • पर्यावरण के बारे में बताते हैं कि यूरिया का बहुत बड़ा भाग नाइट्रस ऑक्साइड के रूप में ग्रीन हाउस गैस के रूप में जाता है, जिसे हम नैनो यूरिया से बचा सकते हैं। यूरिया के प्रयोग से हमारी मिट्टी में पीएच संतुलन बिगड़ जाता है। आमोनिया के चलते जमीन अम्लीय यानी एसिडिक हो जाती है, इससे जो आवश्यक पोषक तत्व पौधों को चाहिये वह नहीं मिल पाते हैं। जबकि नैनो यूरिया का मिट्टी के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है।

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